Semiconductor (सेमीकंडक्टर)
का अर्थ है अर्धचालक,
अर्थात वह मैटेरियल जो चालक और कुचालक दोनों की तरह बिहेवियर दिखाता है उसे अर्धचालक कहते हैं | Very low (बहुत
कम) वोल्टेज पर जिसे Threshold
Voltage
कहते हैं , उससे कम वोल्टेज सप्लाई देने पर अर्धचालक में धारा नहीं बहती परंतु उससे अधिक वोल्टेज देने पर इसमें धारा बहती है | सेमीकंडक्टर मैटेरियल के Valance Band और Conduction Band के बीच का Energy गैप लगभग 1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट ( 1eV) होता है | सेमीकंडक्टर मैटेरियल में इलेक्ट्रॉन के साथ holes होते हैं |
Temperature Effects on Semiconductor Materials
सेमीकंडक्टर मैटेरियल पर ताप का प्रभाव—
सेमीकंडक्टर
मैटेरियल
में
Covalent Bonds, दुर्बल bond होने के
कारण
Temperature increase करने पर इनके
bonds टूटते
हैं
क्योंकि
यह
कमजोर
होते
हैं
और
इलेक्ट्रॉन
and होल(hole) जनरेट
होते
हैं, जिससे इस
सेमीकंडक्टर
मैटेरियल
की
चालकता
या
कंडक्टिविटी
बढ़
जाती
है | Absolute Temperature पर
सेमीकंडक्टर
मैटेरियल
की
चालकता
Zero(शून्य) होती है, जबकि
Room Temperature पर
इसमें
इलैक्ट्रांस
होल्स
जनरेट
होने
के
कारण
इसकी
चालकता
बढ़
जाती
है, अर्थात सेमीकंडक्टर
मैटेरियल
PTC (पॉजिटिव
टेंपरेचर
Coefficient) मैटेरियल होती है |
Conductor(कंडक्टर) मैटेरियल
की
Temperature increase
करने
पर
इसकी
कंडक्टिविटी
घटती
है
क्योंकि
इनमें
इलेक्ट्रॉनों
का
रेंडम
मोशन
होता
है
जिससे
रिजल्टेंट
धारा
का
मान
कम
हो
जाता
है
अर्थात
कंडक्टर
मैटेरियल NTC (नेगेटिव टेंपरेचर
Coefficient )
मैटेरियल
होती
है |
Types of Semiconductor materials
सेमीकंडक्टर मैटेरियल के प्रकार-
सेमीकंडक्टर मैटेरियल दो प्रकार के होते हैं-
1. Direct Band Gap Semiconductor (DBG-SC)
2. Indirect Band Gap Semiconductor (IDBG-SC)
डायरेक्ट बैंड गैप सेमीकंडक्टर मैटेरियल ( GaAs, ZnS, InP, etc) 99% लाइट उत्पन्न करते हैं जबकि इनडायरेक्ट band गैप सेमीकंडक्टर मैटेरियल 99% Heat उत्पन्न करते हैं |
Purity(शुद्धता) के आधार पर सेमीकंडक्टर मैटेरियल (SC) दो प्रकार का होता है-
1.
Intrinsic
SC (Pure SC)
2.
Extrinsic
SC (Impure SC)
Intrinsic
Semiconductor (Pure SC)
शुद्ध सेमीकंडक्टर मैटेरियल की चालकता या कंडक्टिविटी बहुत ही कम होती है अर्थात इसमें Current बहुत ही कम flow होता है जिससे शुद्ध सेमीकंडक्टर मैटेरियल एक Insulator की तरह बिहेवियर दिखाता है|
Extrinsic
Semiconductor(Impure SC)
शुद्ध सेमीकंडक्टर मैटेरियल लगभग non कंडक्टर की तरह बिहेव करता है अर्थात इसकी कंडक्टिविटी बढ़ाने के लिए इसमें कुछ मात्रा में कंडक्टर मैट्रियल की डोपिंग की जाती है या मिलावट की जाती है, अर्थात वह मटेरियल जिसमे डोपिंग की गई है वह अशुद्ध (Extrinsic) सेमीकंडक्टर मटेरियल कहलाता है|
Doping
(डोपिंग)
किसी शुद्ध सेमीकंडक्टर मैटेरियल
में अशुद्धि के
रूप में किसी
Tri-valent या Penta-valent टाइप
के मटेरियल की
मिलावट करने से
बने सेमीकंडक्टर मैटेरियल
को Extrinsic (अशुद्ध ) सेमीकंडक्टर मैटेरियल
कहते है और इस प्रक्रिया
को डोपिंग कहते
हैं|
Doping करने से सेमीकंडक्टर मैटेरियल दो टाइप का बनता है-
1. N-Type Semiconductor Material
2. P-Type Semiconductor Material
Types
of Doping
डोपिंग तीन प्रकार
का
होता
है-
1. हाई
लेवल
डोपिंग
या
स्ट्रांग
डोपिंग
2. मीडियम
लेवल
डोपिंग
या
मध्यम
डोपिंग
3. Low लेवल
डोपिंग
या
निम्न
डोपिंग |
हाई लेवल डोपिंग or स्ट्रांग डोपिंग
से
बने
सेमीकंडक्टर
मैटेरियल
P+ तथा N+ टाइप्स के
होते
हैं
जबकि
मीडियम
लेवल
डोपिंग
से
बने
सेमीकंडक्टर
मैटेरियल
समानता
P और N टाइप के
होते
हैं
and Low लेवल
डोपिंग
से
बने
सेमीकंडक्टर
मैटेरियल
P- तथा N- टाइप के
होते
हैं|
Extrinsic
Semiconductor Materials-
1.
N-Type
Semiconductor Material
जब किसी शुद्ध सेमीकंडक्टर मैटेरियल में कोई Penta-valent(पेंटावेलेंट) टाइप का मैट्रियल मिलाया जाता है तो इस प्रकार का बना मैटेरियल N- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल कहलाता है| Penta-valent(पंच संयोजी) तत्व के रूप मे As, P इत्यादि मटेरियल का प्रयोग अशुद्धि के रूप में किया जाता है|
सेमीकंडक्टर मैटेरियल के बाहरी कक्ष में केवल 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं जबकि पंच संयोजित तत्व जैसे As के बाहरी कक्ष में 5 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिसके कारण सेमीकंडक्टर मैटेरियल जैसे सिलिकॉन के चारों इलेक्ट्रॉन As के चारों इलेक्ट्रॉनों से Covalent बांड या संयोजी बंध तो बना लेते हैं परंतु और As मटेरियल का पांचवा इलेक्ट्रॉन bond नहीं बना पाता है जिससे वह Free(फ्री) रहता है|
इस प्रकार जितनी अधिक मात्रा में As अर्थात अशुद्धि मैट्रियल की मिलावट या डोपिंग की जाती है, सेमीकंडक्टर मैटेरियल में उतनी ही अधिक मात्रा में इलेक्ट्रॉन Free हो जाते हैं सेमीकंडक्टर मैटेरियल में | जिसके कारण यह शुद्ध सेमीकंडक्टर मैटेरियल(Si, Ge) नेगेटिव (Negative) टाइप का बन जाता है क्योंकि इलेक्ट्रॉन पर आवेश नेगेटिव होता है|
1.
P-Type
Semiconductor Material
किसी शुद्ध सेमीकंडक्टर मैटेरियल को P-टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल बनाने के लिए उसमें तीन संयोजी या Tri-Valent टाइप के मैटेरियल्स जैसे एलुमिनियम, Ga, In या बोरान इत्यादि की मिलावट की जाती है|
ट्राई valent होने के कारण
जैसे एलमुनियम के
तीन इलेक्ट्रॉन सेमीकंडक्टर
मैटेरियल जैसे Si सिलिकॉन के 4 इलेक्ट्रॉन
से बांड तो
बना लेते हैं
परंतु सिलिकॉन का
एक इलेक्ट्रॉन बांड
नहीं बना पाता
है जिससे एलमुनियम
के पास एक
होल जोकि पॉजिटिव
टाइप का होता
है create, क्रिएट हो जाता
है जिसे Free Hole फ्री
होल कहते है|
इस प्रकार जितनी अधिक
मात्रा में ट्राई
वैलेंट जैसे एलमुनियम
या गैलियम, सेमीकंडक्टर मैटेरियल में
मिलाए जाएगी उतनी
ही ज्यादा मात्रा
में फ्री Holes
उस सेमीकंडक्टर मैटेरियल
में उत्पन्न हो
जाते हैं जिससे
yah सेमीकंडक्टर मैटेरियल पॉजिटिव टाइप
(P-Type) हो जाता है
क्योंकि होल्स पर आवेश धनात्मक
होता है|
2.


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