Skip to main content

Diode

                                                                

Diode (डायोड )


Diode डायोड का अर्थ है दो इलेक्ट्रोड। डायोड में दो इलेक्ट्रोड कैथोड और एनोड होते हैं। डायोड एक Unidirectional and Uni-polar कंपोनेंट है,  अतः इसमें केवल एक दिशा में एनोड से कैथोड की तरफ धारा बहती है ।

Types of Diodes- 

(a) स्विचिंग के आधार पर डायोड दो प्रकार के होते हैं -

हाई स्विचिंग डायोड और

Low(लो) स्विचिंग डायोड ।

(b) Applications (एप्लीकेशन) के आधार पर डायोड कई प्रकार के होते हैं जैसे-

1. PN Junction Diode(पीएन जंक्शन डायोड)- रेक्टिफायर के रूप में

2. Zener Diode(जेनर डायोड )- वोल्टेज रेगुलेटर में

3. Varactor Diode(वैरेक्टर डायोड )- कैपेसिटर के रूप में

4. Tunnel Diode(टनल डायोड)-  हाई पावर स्विचिंग के लिए

5. LED(लाइट एमिटिंग डायोड- एलईडी ) प्रकाश के लिए

6. Photo Diode(फोटोडायोड)-  लाइट डिटेक्टर के रूप में etc.


Fabrication of Diode-

डायोड को डिफ्यूजन विधि आदि द्वारा N-Type सेमीकंडक्टर मैटेरियल और P-Type सेमीकंडक्टर मैटेरियल से बनाया जाता है | Diode में सामान्यतः P-टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल और N-टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल दोनों समान Doping(डोपिंग ) level के होते हैं ।

फेब्रिकेशन के समय डायोड के जंक्शन पर एक barrier voltage (बैरियर वोल्टेज) Vb Create (उत्पन्न)  हो जाता है जिसका मान Si (सिलिकॉन) सेमीकंडक्टर मैटेरियल के लिए 0.6 से 0.7V ( वोल्ट) होता है, जबकि Ge  मटेरियल के लिए 0.2 वोल्ट से 0.3V तक होता है ।


Physical Structure of Diode-

डायोड Two (2) टर्मिनल एनोड एंड कैथोड वाली P -टाइप और N- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल से बनी एक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स होती है,  जिसके मिडिल में एक Junction होता है जिसके दोनों साइड Depletion Layer(डिप्लीशन लेयर ) होती है ।


Diode


 Depletion Layer( डिप्लीशन लेयर)

Diode  के fabrication (फेब्रिकेशन) के समय डिप्लीशन लेयर में इलेक्ट्रॉन और होल की मात्रा बराबर होने के कारण इसमें कोई भी एक्टिव चार्ज Carrier(करियर)  नहीं होता है जिससे इसमें केवल Immobile चार्ज Carriers होते हैं, which are neutrals.

डिप्लीशन लेयर में डायोड की P- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल ke side Acceptor ions  होते हैं जबकि N-Type सेमीकंडक्टर मैटेरियल की तरफ Donar आयन होते हैं|  इस प्रकार डिप्लीशन लेयर में कोई भी एक्टिव चार्ज Carriers  नहीं होता है, बल्कि केवल Immobile Charge Carriers  होते हैं ।

P- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल से जुड़ा हुआ टर्मिनल एनोड hota है जबकि N- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल से जुड़ा हुआ टर्मिनल कैथोड कहलाता है ।


Working of Diode

डायोड को दो तरह से पावर सप्लाई दी जाती है-

1. Farward Biasing

2. Reverse Biasing


1. Farward Biasing 

इस तरह की biasing me डायोड के Anode पर +ve Voltage ( पॉजिटिव वोल्टेज )तथा Cathode पर -ve Voltage (नेगेटिव वोल्टेज ) दिया जाता है।

डायोड के Anode पर पॉजिटिव वोल्टेज होने के कारण  P- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल के Majority (मेजॉरिटी) कैरियर -Holes जंक्शन की तरफ जाते हैं जबकि Minority (माइनोटी) कैरियर -इलेक्ट्रॉन टर्मिनल की तरफ जाते हैं ।

Farward biased Diode 

इसी टाइम Cathode  पर नेगेटिव वोल्टेज होने के कारण N- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल के मेजॉरिटी करियर्स (Majority Carriers) अर्थात इलेक्ट्रॉन जंक्शन की तरफ जाते हैं, जबकि Minority (माइनोटी) कैरियर -Holes टर्मिनल की तरफ जाते हैं ।

Hence, in farward Biasing there is current only due to majority carriers.


सिलिकॉन मटेरियल से बने डायोड में जब Farward Bias वोल्टेज की value (वैल्यू) 0.6 वोल्ट से 0.7 वोल्ट से कम देने पर बैरियर वोल्टेज होने के कारण majority कैरियर जंक्शन को पार नहीं कर पाते हैं जबकि 0.6 V या 0.7 वोल्ट से अधिक देने पर मेजोरिटी कैरियर जंक्शन को पार कर जाते हैं जिसके कारण डायोड में एनोड से कैथोड की तरफ एक Farward Current(फारवर्ड करंट) flow( फ्लो) होती है।

Farward बॉयस वोल्टेज का मान बढ़ाने पर डिप्लीशन लेयर की चौड़ाई घटती है ।

Silicon Material से बने डायोड में 0.6 V or 0.7 वोल्ट से कम वोल्टेज देने पर मेजॉरिटी करियर जंक्शन को पार न कर पाने के कारण इसमें केवल Leakage Current(लीकेज धारा) flow होती है ।


2. Reverse Biasing 

इस तरह की Reverse Biasing में डायोड के Anode पर नेगेटिव वोल्टेज तथा कैथोड पर पॉजिटिव वोल्टेज प्रोवाइड किया जाता है, जिसके कारण P-टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल के मेजॉरिटी करियर्स Holes(होल ) terminal की तरफ जबकि माइनॉरिटी कैरियर इलेक्ट्रॉन जंक्शन की तरफ flow होते हैं,  इसी time (टाइम) N- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल के मेजॉरिटी कैरियर इलेक्ट्रॉन टर्मिनल की तरफ जबकि माइनॉरिटी कैरियर Holes जंक्शन की तरफ move करते हैं।

Reverse Biasing of Diode 


Hence, in Reverse Biasing there is current only due to minority carriers.

रिवर्स बॉयस वोल्टेज का मान बढ़ाने पर डिप्लीशन लेयर की चौड़ाई बढ़ती है जिसके कारण माइनॉरिटी कैरियर के कम मात्रा होने के कारण यह जंक्शन को पार नहीं कर पाते हो जिससे वोल्टेज क|मान और अधिक देना पड़ता है | जैसे-जैसे वोल्टेज का मान बढ़ाया जाता है वैसे-वैसे माइनॉरिटी कैरीयस पर लगने वाला Repulsive (रिपल्शन) forces का मान बढ़ता है जिसके कारण इनकी Mobility (मोबिलिटी ) बढ़ती है और एक समय एक अधिक वोल्टेज पर जिसे Reverse Break Dawn वोल्टेज कहते हैं, Minority Carriers उस जंक्शन को पार कर जाते हैं और सर्किट में एक लार्ज करंट जिसे Saturation Current (सैचुरेशन करंट) कहते हैं, flow होना स्टार्ट हो जाती है ।

रिवर्स ब्रेकडाउन वोल्टेज का मान काफी अधिक होने के कारण इसमें Saturation Current large होती है जिसके कारण अगर यह धारा डायोड में काफी देर तक रहेगी तो डायोड Permanentaly ( परमानेंटली)  Damage (डैमेज) हो जाएगा ।

अर्थात डायोड को रिवर्स बॉयस में ON नहीं किया जाता है।

रिवर्स ब्रेकडाउन वोल्टेज से कम वोल्टेज देने पर डायोड में केवल लीकेज करंट फ्लो होती है जिससे डायोड ऑफ रहता है ।

Normal P-N  जंक्शन डायोड को केवल फॉरवार्ड बॉयस में ऑन किया जा सकता है अर्थात diode (डायोड) एक Unidirectional Component होता है जिसमें धारा एनोड से कैथोड की तरफ flow होती हैं ।


Applications of PN-Junction Diode

P-N जंक्शन डायोड का उपयोग Rectifier (रेक्टिफायर) के रूप में किया जाता है, जो AC (एसी ) पावर सप्लाई को DC (डीसी ) Power सप्लाई में कन्वर्ट करता है ।

Rectifiers (रेक्टिफायर) दो प्रकार के होते हैं

1. Half Wave Rectifier (हाफ वेव रेक्टिफायर)

2. Full Wave Rectifier (फुल वेव रेक्टिफायर)

 Full Wave Rectifier दो (2) प्रकार का होता है-

(a) Centre Tapped Full Wave Rectifier

(b) Bridge type Rectifier 



Comments

Popular posts from this blog

Semiconductor Materials (सेमीकंडक्टर मैटेरियल)

  Semiconductor ( सेमीकंडक्टर ) का अर्थ है अर्धचालक , अर्थात वह मैटेरियल जो चालक और कुचालक दोनों की तरह बिहेवियर दिखाता है उसे अर्धचालक कहते हैं | Very low ( बहुत कम )   वोल्टेज पर जिसे Threshold Voltage कहते हैं , उससे कम वोल्टेज सप्लाई देने पर अर्धचालक में धारा नहीं बहती परंतु उससे अधिक वोल्टेज देने पर इसमें धारा बहती है | सेमीकंडक्टर मैटेरियल के Valance Band और Conduction Band के बीच का   Energy गैप लगभग 1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट ( 1eV) होता है | सेमीकंडक्टर मैटेरियल में इलेक्ट्रॉन के साथ holes होते हैं  | Temperature Effects on Semiconductor Materials सेमीकंडक्टर मैटेरियल पर ताप का प्रभाव — सेमीकंडक्टर मैटेरियल में Covalent Bonds, दुर्बल bond होने के कारण Temperature increase करने पर इनके bonds टूटते हैं क्योंकि यह कमजोर होते हैं और इलेक्ट्रॉन and होल (hole) जनरेट होते हैं ,   जिससे इस सेमीकंडक्टर मैटेरियल की चालकता या कंडक्टिविटी बढ़ जाती है | Absolute T...

DIAC

  DIAC का अर्थ है टू (2) टर्मिनल वाली पावर इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्पोनेंट्स जो एसी पावर सप्लाई में use होती है। यह एक bi-directional कंपोनेंट है। जिससे इसका प्रयोग AC( एसी ) तथा DC ( डीसी ) दोनों पावर सप्लाई में किया जा सकता है। Physical Structure of DIAC DIAC 3 सेमीकंडक्टर layers(PNP), 2 टर्मिनल तथा 2 major जंक्शंस वाली एक सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट होती है , जिसमे टर्मिनल्स के रूप में MT1 तथा MT2 दो टर्मिनल्स होते हैं। इसमें MT1 तथा MT2 दोनों टर्मिनल P- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल से कनेक्टेड होते हैं। इस मे  P- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स में दो highly doped N- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल Epitaxial growth( एपिटैक्सियल ग्रोथ ) द्वारा डिपॉजिटेड होता है। इस प्रकार इनके बीच में 2 minor जंक्शन होते हैं। Structure of DIAC Working of DIAC       1. When MT1 terminal is at +ve Voltage with respect to MT2 terminal जब MT1 टर्मिनल पर MT2 टर्मिनल के सापेक्ष +ve Vltage( पॉजिटिव वोल्ट...

SCR (Silicon Controlled Rectifier)

  SCR ( सिलीकान कंट्रोल्ड रेक्टिफायर ) को Thyristor भी कहते हैं। SCR, Silicon ( सिलिकॉन ) material ( मटेरियल ) से बनी एक High Power Electronics Component ( हाई पावर इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्पोनेंट्स ) होती है जिसका उपयोग Rectifier ( रेक्टिफायर ), Inverter ( इनवर्टर ) और others Switching Devices ( स्विचिंग डिवाइसेज ) बनाने में किया जाता है। Physical Structure of SCR/ Thyristor सिलीकान कंट्रोल्ड रेक्टिफायर एक 4 सेमीकंडक्टर लेयर और 3 टर्मिनल वाली एक पावर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स होती है। जिसमें 4 सेमीकंडक्टर लेयर PNPN और तीन जंक्शन होते हैं। इसमें टर्मिनल के रूप में एनोड , कैथोड और गेट होते हैं जिसमें एनोड P- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल से तथा कैथोड N- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल से और गेट पी टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल से कनेक्टेड होता है। Structure of SCR Anode टर्मिनल से कनेक्टेड P- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल और कैथोड टर्मिनल से कनेक्टेड N- टाइप सेमीकंडक्टर मैटेरियल दोनों heavily dopped होते हैं , जब...