DIAC
का
अर्थ
है
टू(2) टर्मिनल
वाली
पावर
इलेक्ट्रॉनिक्स
कॉम्पोनेंट्स
जो
एसी
पावर
सप्लाई
में
use होती
है।
यह
एक
bi-directional कंपोनेंट है।
जिससे
इसका
प्रयोग
AC(एसी) तथा DC(डीसी) दोनों
पावर
सप्लाई
में
किया
जा
सकता
है।
Physical
Structure of DIAC
DIAC 3 सेमीकंडक्टर
layers(PNP), 2 टर्मिनल तथा
2 major जंक्शंस
वाली
एक
सेमीकंडक्टर
इलेक्ट्रॉनिक
कॉम्पोनेंट
होती
है,
जिसमे
टर्मिनल्स
के
रूप
में
MT1 तथा
MT2 दो
टर्मिनल्स
होते
हैं।
इसमें
MT1 तथा
MT2 दोनों
टर्मिनल
P-टाइप
सेमीकंडक्टर
मैटेरियल
से
कनेक्टेड
होते
हैं।
इसमे P-टाइप
सेमीकंडक्टर
मैटेरियल्स
में
दो
highly doped N-टाइप सेमीकंडक्टर
मैटेरियल
Epitaxial growth(एपिटैक्सियल
ग्रोथ)
द्वारा
डिपॉजिटेड
होता
है।
इस
प्रकार
इनके
बीच
में
2 minor जंक्शन
होते
हैं।
Working
of DIAC
1. When MT1 terminal is at +ve Voltage with respect to MT2 terminal
जब MT1 टर्मिनल पर MT2 टर्मिनल के सापेक्ष +ve Vltage(पॉजिटिव वोल्टेज) अप्लाई किया जाता है, तब इसका मेजर junction J1 फॉरवर्ड bias में तथा दूसरा Major जंक्शन J2 रिवर्स बॉयस्ड कंडीशन में हो जाता है। इस समय junction, J2 पर डिप्लीशन लेयर की width बढ़ जाती है जबकि J1 पर डिप्लीशन लेयर की width घट जाती है। जिससे J1 junction के मेजॉरिटी कैरियर आसानी से जंक्शन J1 को पार कर जाते हैं परंतु J2 जंक्शन के माइनोरिटी कैरियर J2 जंक्शन को पार नहीं कर पाते हैं जिसके कारण मेन सप्लाई वोल्टेज को increase (बढ़ाना) करना होता है।
जब मेन
सप्लाई
वोल्टेज
को
J2 जंक्शन
के
रिवर्स
ब्रेकडाउन
वोल्टेज
के
बराबर
वोल्टेज
का
अप्लाई
कर
दिया
जाता
है
तब
J2 जंक्शन
के
भी
minority Carriers(माइनॉरिटी कैरियर्स) J2 जंक्शन
को
पार
कर
जाते
हैं।
इस
प्रकार
Diac के
majority(मेजॉरिटी) तथा
minority carriers(माइनोरिटी करियर्स) सभी
junctions को पार करते
है
जिससे
DIAC में
एक
current MT1 terminal से MT2 terminal की
तरफ
flow होती
है
और
DIAC ON हो
जाता
है।
अर्थात् Diac के
टर्मिनल
1 पर
+ve Voltage तथा टर्मिनल 2 पर
-ve Voltage देने पर Diac farward break
over voltage (VFBO) पर
ही
ON हो
सकता
है।
जिसमे
current की
दिशा
MT1 से
MT2 की
तरफ
होती
है।
2. When MT1 terminal is
at -ve Voltage with respect to MT2 terminal
जब MT1 टर्मिनल
पर
MT2 टर्मिनल
के
सापेक्ष
–ve Voltage(नेगेटिव वोल्टेज)
अप्लाई
किया
जाता
है,
तब
इसका
मेजर
junction J1, reverse बायस में
तथा
दूसरा
Major जंक्शन
J2, farward बॉयस कंडीशन में
हो
जाता
है।
इस
समय
J1 पर
डिप्लीशन
लेयर
की
width बढ़
जाती
है
जबकि
J2 पर
डिप्लीशन
लेयर
की
width घट
जाती
है।
जिससे J2 junction के
मेजॉरिटी
कैरियर
आसानी
से
जंक्शन
J2 junction को पार कर
जाते
हैं
परंतु
J1 जंक्शन
के
माइनोरिटी
कैरियर
J1 जंक्शन
को
पार
नहीं
कर
पाते
हैं
जिसके
कारण
मेन
सप्लाई
वोल्टेज
को
increase (बढ़ाना) करना होता
है।
जब
मेन
सप्लाई
वोल्टेज
को
J1 जंक्शन
के
रिवर्स
ब्रेकडाउन
वोल्टेज
के
बराबर
वोल्टेज
अप्लाई
कर
दिया
जाता
है
तब
J1 जंक्शन
के
भी
माइनॉरिटी
कैरियर्स
J1 जंक्शन
को
पार
कर
जाते
हैं।
इस
प्रकार
Diac के
मेजॉरिटी
तथा
माइनोरिटी
करियर्स
सभी
junctions को पार करते
है
जिससे
DIAC में
एक
current MT2 terminal से MT1 terminal की
तरफ
flow होती
है
और
diac ON हो
जाता
है।
इस वोल्टेज
को
Reverse ब्रेक
ओवर
वोल्टेज
कहा
जा
सकता
है
और
इस
Reverse ब्रेक
ओवर
वोल्टेज
को
और
अधिक
increase करने पर
Diac में
धारा
का
मान
बढ़ने
लगता
है।
अर्थात्
Diac के
टर्मिनल
1 पर
-ve Voltage तथा टर्मिनल 2 पर
+ve Voltage देने पर DIAC, Reverse break
over voltage (VRBO) पर
ही
ON हो
सकता
है।
जिसमे
current की
दिशा
MT2 से
MT1 की
तरफ
होती
है।
अर्थात् DIAC एक
bidirectional component है।
Characteristics
of DIAC
1.
Farward biased characteristics
MT1 को
पॉजिटिव
वोल्टेज
MT2 को
नेगेटिव
वोल्टेज
देने
पर,
जब
yah वोल्टेज
इसके
फॉरवर्ड
ब्रेक
ओवर
वोल्टेज
से
कम
होता
है
तब
Diac में
केवल
leakage करंट
फ्लो
होती
है
और
Diac ऑफ off
रहता
है।
जब इस
वोल्टेज
को
फॉरवर्ड
ब्रेक
ओवरवोल्टेज
या
उससे
अधिक
provide किया जाता है
तब
DIAC में
एक
high(हाई) करंट
फ्लो
होने
लगने
लगती
है
जो
MT1 से
MT2 की
तरफ
फ्लो
होती
हैं। और DIAC ON हो जाता
है।
अर्थात DIAC अपने farward break over voltage(VFBO) पर ही ON होता है।
2. Reverse biased characteristics
MT1 को
नेगेटिव
वोल्टेज
MT2 को
पॉजिटिव
वोल्टेज
देने
पर,
जब
yah वोल्टेज
इसके
reverse ब्रेक
ओवर
वोल्टेज
से
कम
होता
है
तब
Diac में
केवल
leakage करंट
फ्लो
होती
है
और
Diac ऑफ off
रहता
है।
जब इस
वोल्टेज
को
reverse ब्रेक
ओवरवोल्टेज
या
उससे
अधिक
किया
जाता
है
तब
DIAC में
एक
high करंट फ्लो
होने
लगने
लगती
है
जो
MT2 से
MT1 की
तरफ
फ्लो
होती
हैं।
और
DIAC ON हो
जाता
है।
अर्थात diac अपने reverse break over voltage(VRBO) पर ही ON होता है।
Symbol
of DIAC
Applications
of DIAC
Bidirectional component
होने
से
DIAC ka use AC तथा DC दोनो
power supply में किया जाता
है।
1.
Triggering of TRIAC, SCR and UJT etc..
2. Speed control of AC/DC Moters.






Sir isme forward aur reverse bias nahi hota hai??
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